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Thursday, June 4, 2015

मैगी खरीदने जा रहे है तो पढ़ें यह खबर



छिपा हो सकता है अजीनोमोटो

(Monosodium Glutamate MSG Ajinomoto)

सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्‍लूटामेट यानी अजीनोमोटो, Monosodium Glutamate MSG Ajinomoto एक सोडियम साल्‍ट है। अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्‍योंकि यह एक मसाले के रूप में उनमें इस्‍तमाल किया जाता है।
शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्‍वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में यह धीमा जहर खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है।
यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है।
जान लें कि कैसे-
* सिर दर्द, पसीना आना और चक्‍कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है।
* इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्‍वचा में खिंचाव महसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्‍ट हो सकते हैं।
* इसका ज्‍यादा प्रयोग से धीरे धीरे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्‍कत और आलस भी पैदा कर सकता है। इससे सर्दी-जुखाम और थकान भी महसूस होती है। इसमें पाये जाने वाले एसिड सामग्रियों की वजह से यह पेट और गले में जलन भी पैदा कर सकता है।
* पेट के निचले भाग में दर्द, उल्‍टी आना और डायरिया इसके आम दुष्प्रभावों में से एक हैं।
* अजीनोमोटो आपके पैरों की मासपेशियों और घुटनों में दर्द पैदा कर सकता है। यह हड्डियों को कमज़ोर और शरीर द्वारा जितना भी कैल्‍शिम लिया गया हो, उसे कम कर देता है।
* उच्च रक्तचाप की समस्‍या से घिरे लोगों को यह बिल्‍कुल नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि इससे अचानक ब्‍लड प्रेशर बढ़ और घट जाता है।
* व्‍यक्तियों को इससे माइग्रेन होने की समस्‍या भी हो सकती है। आपके सिर में दर्द पैदा हो रहा है तो उसे तुरंत ही खाना बंद कर दें।
* अजीनोमोटो की उत्पादन प्रक्रिया भी विवादास्पद है : कहा जाता है कि इसका उत्पादन जानवरों के शरीर से प्राप्त सामग्री से भी किया जा सकता है।
*अजीनोमोटो बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण स्कूल जाने वाले ज्यादातर बच्चे सिरदर्द के शिकार हो रहे हैं। भोजन में एमएसजी का इस्तेमाल या प्रतिदिन एमएसजी युक्त जंकफूड और प्रोसेस्ड फूड का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एमएसजी युक्त डाइट बच्चों में मोटापे की समस्या का एक कारण है। इसके अलावा यह बच्चों को भोजन के प्रति अंतिसंवेदनशील बना सकता है। मसलन, एमएसजी युक्त भोजन अधिक खाने के बाद हो सकता है कि बच्चे को किसी दूसरी डाइट से एलर्जी हो जाए। इसके अलावा, यह बच्चों के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का भी एक कारण है।

छिपा हो सकता है अजीनोमोटो

अब पूरी दुनिया में मैगी नूडल बच्चे बड़े सभी चाव से खाते हैं, इस मैगी में जो राज की बात है वो है
Hydrolyzed groundnut protein और स्वादवर्धक 635 Disodium ribonucleotides
यह कम्पनी यह दावा करती है कि इसमें अजीनोमोटो यानि MSG नहीं डाला गया है।
जबकि Hydrolyzed groundnut protein पकने के बाद अजीनोमोटो यानि MSG में बदल जाता है और Disodium ribonucleotides इसमें मदद करता है।

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Thursday, May 28, 2015

               Dulcoflex Tablets Details 

Dulcoflex tablet is allopathic medicine for getting relief from occasional constipation. Generic name of this medicine is Bisacodyl. Bisacodyl salt is stimulant laxative for emptying bowel. This medicine is for oral intake, 1 tablet should be taken with glass of water. The laxative effect of medicine takes place after six hours of oral intake. So when taken at bed time, evacuation of bowel takes place next morning.
It should not be chewed or crushed as that may destroy protective coating of medicine. This medicine is not meant for long term use and should be taken only occasionally as per need.
This medicine should not be taken for more than a week. Long term use causes laxative dependence and chronic constipation.
This medicine should not be taken with antacids and milk. Maintain a gap of 1-2 hours between milk, antacid intake and Dulcoflex use.

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Wednesday, November 19, 2014

Leucorrhoea -- a Disease of Most Women in this time श्वेत प्रदर-




श्वेत प्रदर जैसा कि इसका नाम से ही समझ आ रहा है कि यह एक ऐसा रोग है जिसमें स्त्रियों की योनि Vagina से सफेद सा स्राव या पानी जो जुकाम के समय निकलने बाले पानी जैसा गाड़ा व लसलसा तथा चिपचिपा होता है। जिसमें बदबू भी आ सकती है।यह ल्यूकोरिया या श्वेत प्रदर कहलाता है।
                           वैसे प्राकृतिक अवस्था में भी  किशोरी स्त्रियों में हार्मोन्स के प्रभाव से सम्भोग उत्तेजना में या गर्भावस्था की शुरुआत में विभिन्न ग्रंथियों से तरल निकलते हैं यह एक स्वभाविक प्रक्रिया है और इस प्राकृतिक स्थिति में कोई बदबू भी नही आती और यह न ही कोई रोग है।
रोग के कारण- इस रोग के अनेक कारण हो सकते है फिर भी मुख्य कारण हैं-

     योनि मार्ग की साफ सफाई न करना,Trichomonal & Monolial कीटाणुओं के संक्रमण से योनि की दीवारो मे सूजन व जलन,सुजाक व आतसक के परजीवियों का संक्रमण,खराब स्वास्थ्य,खून की कमी,कुपोषण,अत्यधिक कामुक चिन्तन,पति या प्रेमी की याद,भय,चिन्ता,विषाद,फैशन परस्तता,अधिक आराम,पशुओं से या अप्राकृतिक वस्तुओं से मैथुन या सेक्स,उपदंश या सुजाक रोगी पुरुष से सेक्स,हमेशा कब्ज बना रहना,पेट मे कीड़े,दस्तों का अधिक दिनो तक लगा रहना,अनचाहै गर्भ गिराने के लिए दवाओं के उपयोग से, सेक्स सुख बढ़ाने के लिए लेपों,क्रीमों,व कैमिकलों का प्रयोग,गर्भ निरोधक बत्तियों,कैमिकलों,या पैसरीज़ का ठीक से न लगना,अनियमित मासिक,बार बार गर्भ गिराना,जल्दी जल्दी प्रसव,लूप का सही न लगना,सन्तान रोकने की गोलियाँ खाना,काफी,चाय का अत्यधिक प्रयोग,मदिरापान ,खट्टे तीखे व ज्यादा मसाले दार वस्तुओं का प्रयोग,माँसाहार,धूम्रपान,आदि कारण हैं जिनसे यह रोग फैलता है या होता है।
            उपरोक्त कारणों पर एक नजर डालने से पता चलता है कि यह रोग उन महिलाओं या किशोरियों को आ घेरता है जो ज्यादा आधुनिकता का दिखावा ही नही करती अपितु गलत सही का ध्यान भी नही रखती।


रोग निवारणः- मैं पहले भी लिख चुका हूँ कि रोग समाप्ति के लिए कोई दवा करने की अपेक्षा रोग होने के कारण का निवारण              ही सबसे उपयुक्त निवारण है। फिर भी आयुर्वेद ने एसे लोगों पर भी अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखी है।
1- नीम के पत्ते डालकर उबाले हुए जल से प्रति दिन योनि को साफ करें जब लाभ हो जाए तो फिर दो दिन में एक बार तथा बाद में भी सप्ताह में एक बार अवश्य ही योनि की सफाई करें। सफाई के तुरन्त वाद साफ कपड़े से पौछकर अशोक घृत का फाया योनि के अन्दर रखे।

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